कम उम्र में भी दिल की बीमार हो रही महिलाएं 
By nawaj gi On 19 Oct, 2015 At 11:42 AM | Categorized As Latest News, हृदय रोग | With 0 Comments
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– मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, देहरादून में हुआ चिंतन 
 
ब्यूरो। आमतौर पर ये माना जाता है कि दिल की बीमारी उम्रदराज लोगों को ही होती है। लेकिन, युवाओं में बढ़ रही इस बीमारी ने इस मिथक को गलत साबित किया है। खासतौर पर महिलाओं में इसकी संख्या यकायक बढ़ी है। 
हाल ही में किए गए अध्ययनों से स्पष्ट हो गया है अधिक संख्या में महिलाएं आज हृदय रोगों का शिकार हो रहीं हैं, ऐसे में यह मिथक दूर हो रहा है कि दिल का दौरा सिर्फ पुरुषों को होने वाली बीमारी है। हृदय रोगों का खतरा नया खतरा नहीं है। यह पिछले कई सालों से हमारे समाज में अपनी पकड़ मजबूत बना रहा है और हमारी मुश्किल जीवनशैली पर कई तरह से सवाल उठा रहा है। चिंताजनक तथ्य यह हैं कि यह बीमारी आज महिलाओं को उनकी प्रजनन आयु में अपना शिकार बना रही है, जबकि कुछ साल पहले तक महिलाएं रजोनिवृत्ति के बाद ही इसकी चपेट में आती थीं। इसका मुख्य कारण है घर और कार्यस्थल पर बढ़ता तनाव। इसके साथ-साथ कुछ अन्य कारक जैसे मधुमेह, मोटापा एवं इससे सम्बन्धित बीमारियां और शारीरिक निष्क्रियता के चलते भी इन मामलों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। 
 
मैक्स सुपर स्पेशलटी अस्पताल, देहरादून में प्रिंसिपल कन्सलटेन्ट एवं एचओडी-कार्डियोलोजी डॉ़ प्रीती शर्मा ने हाल ही के एक मामले के बारे में बताते हुए कहा, ”46 साल की कुसुम सामान्य और सक्रिय जीवन जी रही थी, अचानक उनकी छाती के बायें हिस्से में दर्द महसूस हुआ, जो चार दिन तक जारी रहा। परिजन उन्हें हरिद्वार के एक निजी अस्पताल में लेकर गए लेकिन उन्हें तुरन्त मैक्स सुपर स्पेशलटी अस्पताल, देहरादून भेज दिया गया। भर्ती करने के बाद उनमें बार-बार सीने में दर्द की शिकायत पाई गई, डॉ़ प्रीति और डॉ़ पुनीष सदाना ने इस मामले को अपने हाथों में लिया। उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें प्री-कैथ जांच की सलाह दी गई। जांच के परिणाम सामान्य नहीं थे। जांच में उनकी दो धमनियां ब्लॉक हो चुकी थीं, एक धमनी 100 फीसदी और दूसरी धमनी 90 फीसदी ब्लॉक थी। हमने उनके उपचार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्डियक प्रक्रिया-एन्जियोप्लास्टी को अंजाम दिया और उनके जीवन को बचा लिया गया।” 
डॉ. प्रीति शर्मा ने बताया कि ‘ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं जो धूम्रपान या शराब का सेवन नहीं करती और उनके परिवार में दिल का दौरे का इतिहास नहीं हैं, इसके बावजूद वे इस बीमारी का शिकार हो रहीं हैं। 
 
क्या हैं लक्षण 
– सीने में दर्द की शिकायत 
– मधुमेह यानी शुगर का बढ़ना 
– थकान रहना और सांस लेने में परेशानी 
– अपच और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द रहना 
– जबड़े या गले में दर्द, हाथों और सीने के बाएं और दाएं हिस्से या बीच के हिस्से में दर्द होना 
 
 
बहुत सी महिलाएं यह सोच कर इन लक्षणों की अनदेखी कर देती हैं कि दिल का दौरा उन्हें नहीं हो सकता। हम महिलाओं से आग्रह करते हैं कि इस तरह के लक्षणों की अनदेखी न करें और तुरन्त अपने डॉक्टर की सलाह लें।
डॉ. पुनीष सदाना ने महिलाओं में बढ़ते दिल के दौरे पर बताया कि ‘आबादी बढ़ने के साथ दुनिया भर में हृदय रोगों का खतरा तेज़ी से बढ़ रहा है। खानपान में बदलाव के कारण हमारे शरीर पर विपरीत असर पड़ा है। यही कारण है कि दिल के रोगों के अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप एवं दमा का शिकार हो रहें हैं।
 
इस अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशलटी अस्पताल, देहरादून में जनरल मैनेजर-ऑपरेशन्स डॉ़ संदीप सिंह तंवर ने कहा कि अब तक मैक्स अस्पताल में 1000 (लगभग) से ज़्यादा एन्जियोप्लास्टी एवं 2000 एन्जियोग्राफी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। हम हमेशा से अस्पताल में आपातकालीन स्थिति में आने वाले किसी भी मरीज़ को कार्डियक आपातकालीन देखभाल उपलब्ध कराने के लिए हर तरह की सुविधाओं से सुसज्जित हैं। हमारी विशेषज्ञ कार्डियक केयर टीम अनुभवी है तथा जटिल मामलों को हैण्डल करने में सक्षम है, ऐसे बहुत से मामलों में हम मरीज़ की जिंदगी बचा चुके हैं। हम हमेशा से देहरादून में अन्तरराष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने हेतू प्रयासरत रहें हैं जैसे सभी सुविधाओं से युक्त अत्याधुनिक कैथ लैब, विशिष्टीकृत लेमिनर फ्लो ओटी, तथा एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं जैंसे- जांच, सीटी, एमआरआई, ब्लड बैंक एवं नैदानिक सेवाएं। उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं सहयोगी स्टॉफ के साथ अस्पताल अत्याधुनिक नैदानिक, चिकित्सा एवं गहन देखभाल सेवाएं प्रदान करता है।” 
 
 
 for more detail and any question just email us – niroge129@gmail.com 

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