फाइब्रोमाइलजा तो नहीं आपकी थकान का कारण 

fibromyalgia-pain
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अक्सर शरीर में थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, पेट में दर्द और समय पर नींद ना आना और मानसिक तनाव के कारण से आप परेशान रहते होंगे। क्या आप जानते हैं कि आपकी इस बिमारी के पीछे फाइब्रोमाइलजा हो सकता है। ये अर्थराइटिस से जुड़ा हुआ एक रोग हैं। आयुर्वेद के मुताबिक ये वात दोष के कारण होता है। आइये जानते हैं पतंजलि आयुर्वेद के रिसर्च विंग के प्रमुख डॉ. एम. हेमंत कुमार से आखिर क्या है फाइब्रोमाइलजा और अर्थराइटिस। क्या आयुर्वेद में फाइब्रोमाइलजा का ईलाज है और क्या योग के जरिए इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है। 
 
 
अर्थराइटिस को आम तौर पर जोड़ों में सूजन के रूप में देखा और समझा जाता है। लेकिन, सामुदायिक स्वास्थ्य की दुनिया में हम अर्थराइटिस को सौ से अधिक रूमेटिक बिमारी और कंडीशन के रूप में प्रयोग कर सकते हैं जो सीधे तौर पर जोड़ों, जोड़ों के ईद-गिर्द बनी कोशिकाओं पर प्रभाव डालती हैं। बिमारी का पैटर्न, तीव्रता और लक्षणों की जगह के आधार पर हम विशेष प्रकार की बिमारी का पता लगा सकते हैं। रूमेटिक यानी गठिया रोग से संबंधित अवस्था की विशेषता ये है कि इसमें जोड़ों में दर्द और कठोरता आ जाती है। इसके लक्षण लंबी अवधि में और अचानक भी आ सकते हैं। रूमेटिक कंडीशन इम्यून सिस्टम और शरीर के दूसरे आंतरिक अंगों में भी शामिल हो सकती है। 
 
अर्थराइटिस के प्रकार 
 
विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर हम कह सकते हैं कि अर्थराइटिस निम्न प्रकार की हो सकती है। 
 
– चाइल्डहुड अर्थराइटिस 
– फाइब्रोमाइलजा 
– साधारण 
– गाउट 
– ओस्टियोआर्थराइटिस 
– रूमेटॉयड अर्थराइटिस 
– सिस्टेमिक ल्यूपस एरीथिमाटोसस
 
फाइब्रोमाइलजा – 
फाइब्रोमाइलजा एक डिस्आर्डर है। इसके लक्षणों में जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना, स्लीप डिसटरबेंस यानी समय पर नींद ना आना, थकान, मानसिक तनाव हैं। इनके अलावा भी कई तरह के लक्षण फाइब्रोमाइलजा में हो सकते हैं। ये काफी हद तक क्रोनिक फटीग सिण्ड्रोम यानी सीएफएस से मिलता है। इन दोनों में अंतर ये है कि फाइब्रोमाइलजा में मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता हैं जबकि सीएफएस में थकान होती है। 
 
ये भी हैं लक्षण –
 
– सुबह में अकड़नपन होना 
– हाथों और पैरों में सिहरन और सुन्नपन होना 
– सिर में दर्द होना, माइग्रेन की शिकायत 
– नीदं का समय गड़बड़ा जाना 
– याददाश्त का कमजोर होना 
– महावारी में दर्द होना 
– पेट में अचानक दर्द और डायरिया की शिकायत 
 
फाइब्रोमाइलजा का आयुर्वेद में उपचार 
आयुर्वेद में इसे मनसा धातुगत और मनसाव्रत वात कहा जाता है। फाइब्रोमाइलजा मुख्य तौर पर वात यानी वायु के अनियंत्रित होने के कारण होती है। वात के अनियंत्रित होने से और वात के बढ़ने से सीधा असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हाइपरसेंस्टिविटी बढ़ने के कारण दर्द की शिकायत होती है। अमल के बढ़ने और स्रोतोधारा भी इसमें संभावित कारण होते हैं। 
 
उपचार – 
आयुर्वेद में वात दोष को दूर करने का उपचार किया जाता है। कमजोर पाचन तंत्र, अपच और मानसिक तनाव का भी इलाज किया जाता है। 
फाइब्रोमाइलजा के लिए पंचकर्म थेरेपी 
स्नेहन और स्वेदन इस रोग में काफी लाभदायक होते हैं। इसमें शरीर पर हर्बल तेल से  मसाज की जाती है। रोजाना मसाज से नर्वस सिस्टम मजबूत होता है। 
 
फाइब्रोमाइलजा में आहार 
इस रोग को खत्म करने के लिए आहार एक महत्वपूर्ण सहायक है। निम्न आहार लेना चाहिए। 
– सब्जियों का जूस और सूप 
– नारियल पानी और नारियल दूध 
– गाजर का जूस 
– अदरक, जीरा, धनिया और हींग का प्रयोग करना चाहिए 
– हल्के नमक और नींबू के साथ सलाद लेनी चाहिए 
– खिचड़ी का सेवन भी मददगार साबित होता है 
 
इनसे करें परहेज 
– फाइब्रोमाइलजा गर्म खाना, मिर्च मसालों और तला भोजन नहीं करना चाहिए 
– ज्यादा चाय, कॉफी और शराब का सेन नहीं करना चाहिए 
– दिन के समय सोना और देर रात तक नहीं जागना चाहिए 
– मानसिक तनाव से भी दूर रहना चाहिए 
– मानसिक तनाव दूर करने के लिए आप योगा कर सकते हैं 
 
योग से फाइब्रोमाइलजा का इलाज 
मानसिक तनाव को दूर करने के लिए योग बेहद कारगर साबित होता है। इसके लिए ध्यान, योग, प्रणायाम, अध्यात्मिक साहित्य पढ़ने से लाभ मिलता है। कोशिश करनी चाहिए कि आपका दिमाग सात्विक ही रहना चाहिए। 
 
अपनी समस्या का समाधान जानने के लिए ई—मेल करें  niroge129@gmail.com

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