भारत की आधी आबादी करती है खुले में शौच 

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ब्यूरो। यूनिसेफ के मुताबिक भारत में कुल 59 करोड़ आबादी खुले में शौच करती हैं। ये भारत की पूरी आबादी का करीब आधा हिस्सा है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी सबसे ज्यादा है। शहरों में भी खुले में शौच करने वालों की संख्या कम नहीं है। खासतौर पर मलिन बस्तियों और अस्थायी झुग्गी बस्तियों में शौचालयों की कमी होने के कारण एक बड़ी आबादी को खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ता है। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। जलजनित रोगों के कारण खासोआम बीमार हो रहे हैं। सबसे ज्यादा बच्चें इन बिमारियों से प्रभावित होते हैं। डायरिया, हैजा, टॉयफॉयड, पीलिया और पेट में कीड़े होने की शिकायत आम होती है। लगातार इन बिमारियों की चपेट में आने के कारण बच्चों की ग्रोथ रूक जाती है और बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। यूनिसेफ के मुताबिक इन रोगों के कारण हर रोज करीब एक हजार बच्चे अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। बावजूद इसके भारत में खुले में शौच करने को लेकर बड़ा प्रयास जनता की ओर से नहीं हुआ है। सरकार स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों में शौचालय निर्माण के लिए आर्थिक सहायता देती है। लेकिन, लगातार आबादी के बढ़ने और परिवारों के विभाजन के कारण शौचालयों की मांग और जरूरत भी बढ़ती जा रही है।  साफ-सफाई का ध्यान रखकर और पानी को उबाल कर एहतियात से पीने की प्रक्रिया को अपनाकर इन रोगों से बचा जा सकता है। लेकिन, जागरूकता का अभाव और खुले में शौच की आदत इन सब प्रयासों पर भारी पड़ रही है।

 

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