स्तन के आकार में बदलाव हो सकता है स्तन कैंसर 

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17019ब्यूरो। स्तन कैंसर दुनिया भर में खतरनाक रूप लेता जा रहा है। भारत में भी स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्तन कैंसर स्तन की कोशिकाओं की अनियंत्रित ग्रोथ के कारण होता है। स्तन में गांठ बन जाने के कारण कैंसर होता है। हालांकि, स्तन कैंसर का यदि सही समय पर पता चल जाता है तो ये आसानी से ठीक किया जा सकता है। अगर इसका पता नहीं चलता तो ये शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है। स्तन कैंसर विकसित और विकासशील देशों दोनों में प्रभाव डाल रहा है। ये किसी भी उम्र की महिलाओं को हो सकता है, लेकिन आमतौर पर चालीस साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में पाया जाता है। भारत में पच्चीस से तीस प्रतिशत महिलाओं में स्तन कैंसर पाया जाता है। 
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क्या है कारक 
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भवानी पाल ने मुताबिक स्तन कैंसर के बहुत से कारण हो सकते हैं। लेकिन, ऐसी महिलाएं जिनके परिवार में किसी को स्तन कैंसर रहा है, उनमें इसके होने की संभावना ज्यादा रहती है। इसके अलावा वो महिलाएं जिनके स्तन की मांसपेशियां ज्यादा घनत्व में होती हैं। वहीं उम्र भी एक बड़ा कारण हैं। जो महिलाएं धुम्रपान करती हैं या वसायुक्त  पदार्थ ज्यादा खाती हैं और शराब का सेवन करती हैं, उनमें स्तन कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। एक्स-रे और सीटी स्केन के संपर्क में आनी वाली महिलाएं भी इसका शिकार बन सकती हैं। मोटपा भी स्तन कैंसर का कारण बन सकता है। 
 
स्तन कैंसर के लक्षण 
– स्तन के आकार में बदलाव आना 
– स्तन की त्वचा में बदलाव आना 
– स्तन के निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना 
– स्तन में लगातार दर्द बने रहना 
– स्तन के निप्पल से डिस्चार्ज होना 
– निप्पल के चारों और लाली आना 
– स्तन में गांठ और मोटापन आना 
 
बचाव के उपाय 
स्तन कैंसर से बचाव के लिए अपने स्तनों को खुद एक्जामिन करें। महिलाओं को चाहिए कि अपने स्तनों के बारे में जानकारी रखें और वो कैसे दिखते हैं उनका आकार क्या हैं और क्या बदलाव आ रहे हैं, इस बारे में महसूस करें। अगर कोई बदलाव आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि चालीस साल की उम्र के बाद मेमोग्राफी टेस्ट कराना चाहिए। अपने खाने में सब्जियों और फलों की मात्रा बढ़ाकर इससे दूर रहा जा सकता है। प्रसूताओं को ये सलाह दी जाती है कि कम से कम बच्चे को एक साल तक स्तनपान कराना चाहिए। 
 
क्या है मेमोग्राफी टेस्ट 
मेमोग्राफी टेस्ट साधारण सा रेडियाग्राफिक तकनीक से किया गया टेस्ट हैं। इससे स्तन की कोशिकाओं के बारे में पता चल जाता है। इस तरह की भ्रातियां है कि मेमोग्राफी टेस्ट कराने से स्तन कैंसर का खतरा रहता है, जो कि बिल्कुल गलत है। 

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