हरियाणवी सिनेमा को पहचान दिलाना मेरा मकसद : यशपाल शर्मा

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cda6861f-56fc-4a1a-9e8d-c4ae68849a29ब्यूरो। जाने माने सिने अभिनेता और रंगमंच कलाकार यशपाल शर्मा ने कहा कि हरियाणवी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और स्थापित करना उनका मकसद है। इसके लिए वो हरियाणा में बनी दो फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। जल्द ही वो फिल्मों के निर्देशन क्षेत्र में भी उतरेंगे। ताकि हरियाणा के सिनेमा को सही मुकाम तक पहुंचाया जा सके।
हरिद्वार के चर्चित आश्रम मातृ सदन में यशपाल शर्मा अपने मित्र और साहित्यकार डॉ. निलय उपाध्याय से मुलाकात करने हरिद्वार पहुंचे थे। आश्रम में यशपाल शर्मा ने दो दिन गुजारे। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि वो फिल्मों से मुकाबले थियेटर करना ज्यादा पसंद करते हैं। जल्द ही वो अपने दोस्त डॉ. निलय उपाध्याय के दो नाटकों में काम करेंगे। दोनों सोलो एक्ट पर आधारित हैं। एक नाटक की थीम मार्क्स से गालिब की मुलाकात है। हरियाणा के हिसार में जन्में और पले बढ़े यशपाल शर्मा ने कहा कि हरियाणवी सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और स्थापित करने के लिए वो प्रयास कर रहे हैं। वो जब भी हरियाणा जाते हैं तो उनके दोस्त उनसे हरियाणवी सिनेमा के बारे में कुछ करने के लिए कहते थे। अपने दोस्तों की फिल्मों में उन्होंने बिल्कुल मुफ्त काम किया है। दोनों फिल्मे हरियाणा की पृष्ठभूमि और भाषा में ही बनी है। उन्होंने कहा कि यदि मैं ऐसा कर पाया तो ये मेरा सौभाग्य होगा।
यशपाल शर्मा फिल्मों में फूहड़पन और अश्लीलता के भी खिलाफ है। उन्होंने नए कलाकारों को इससे बचने की सलाह भी दी है। अदाकारी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अपने किरदार को अच्छे तरीके से अदा करने के लिए उसमें डूबने की जरूरत होती है। जितना आप से आत्मसात कर पाएंगे, उतनी ही अच्छी तरह आप उसे परदे पर या स्टेज पर परफार्म कर सकेंगे। उन्होंने हरिद्वार में भी थियेटर की शुरूआत करने के लिए सहयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मैं ये दावा नहीं कर सकता है कि हरिद्वार के लिए बहुत कुछ कर दूंगा, लेकिन यहां के कलाकार यदि उन्हें बुलाएंगे तो वो रंगमंच के विकास के लिए जरूर आएंगे।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अदाकारी के हर फन को सीखने वाले यशपाल शर्मा के पंसदीदा कलाकार बलराज साहनी है। मौजूदा दौर के कलाकारों में पंकज कूपर, आमिर खान, संजय मिश्रा आदि से यशपाल ज्यादा प्रभावित नजर आते हैं। जबकि नाटकों में तुगलक उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है।

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