ताकि खाद्य पदार्थों से होने वाले रोगों से बचाया जा सके

Intestinal-Parasites

विश्व स्वास्थ्य संगठन के खाद्य एवं कृषि संगठन की ओर से इटली के रो में तीन दिवसीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। इसमें Codex Alimentarius Commission की ओर खाद्य सुरक्षा और इसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनाई गई। ताकि दूषित खाद्य पदार्थों से होने वाले रोगों से इंसानों को बचाया जा सके। इसमें निम्न बिंदुओं पर ध्यान देने के लिए सभी देशों से आग्रह किया गया। ये बिंदु निम्न हैं,

1— बीफ और सूअर के मांस जानलेवा बैक्टीरिया Salmonella को कंट्रोल करना—

बीफ और पोर्क यानी सूअर के मांस में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसमें नॉन टाइफाडियल सालमोनीला भी शामिल है, जो दुनिया भर में डायरिया का मुख्य कारण बनता है। दुनिया भर में करीब साठ हजार मौतें इसके कारण होती हैं। अधिवेशन में इस बात पर जोर दिया गया कि इस जानलेवा बैक्टीरिया को विशेष माध्यम अपनाकर खत्म करना है। ताकि खाद्य पदार्थों से होने वाले रोगों को कम किया जा सके।

2— foodborne parasites यानी परजीवियों को कंट्रोल करने की सहमति —

दूध, मांस, मछली, फल और सब्जियां कई तरह के परजीवियों से प्रदूषित हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर Toxoplasma gondii and Taenia solium (pork tapeworm) यानी सुअर के मांस में पाए जाने वाला फीताकर्मी। जब इंसान सुअर का कच्चा मांस या अधपका मांस खाता है तो ये परजीवी मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है और इंसान के दिमाग में सिस्ट बना लेता है। ये इंसानों में मिर्गी का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। अधिवेशन में फ्रीजिंग और हीट ट्रीटमेंट व दूसरे तरीके अपनाकर इन परजीवियों को कंट्रोल करने पर जोर दिया गया।

3— न्यूट्रीशियन लेबलिंग के बारे में निर्देश— विटामिन और दूसरे खनिज तत्वों की कमी के कारण हमारे शरीर में कई तरह के विकार उत्पन्न हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर विटामिन ए की कमी के कारण आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है। साथ ही कई तरह के संक्रमण होने का खतरा होता है। विटामिन और खनिज तत्वों की कमी ना हो इसके लिए उचित लेबलिंग के बारे में गाइडलाइन जारी की गइ।

4— husked rice में इनआर्गेनिक आर्सेनिक की मात्रा — आर्सेनिक पृथवी की सतह पर प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाला तत्व है। ये कई खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है क्योंकि इसे खाद्य पदार्थ जमीन और पानी से अवशोषित कर लेते हैं। चावल दूसरे खाद्य पदार्थों के मुकाबले ज्यादा आर्सेनिक अवशोषित कर सकता है। लंबे समय पर ज्यादा आर्सेनिक का प्रयोग हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है। ये कैंसर का कारण बनता है इसके अलावा दिल से जुड़े रोग, मधुमेह और नर्वस तंत्र की तंत्रिकाओं को कमजोर कर सकता है। जो हमारे दिमाग पर असर डालती है। इसलिए ये तय किया गया कि इनआर्गेनिक आर्सेनिक की मात्रा हस्कड चावल में 0.35 mg/kg इससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

4— खाद्य पदार्थो में पेस्टीसाडन की मात्रा — फसलों में कीडों और दूसरे रोगों से बचाव के लिए पेस्टीसाइड का प्रयोग किया जाता है। ये खाद्य पदार्थों के जरिए इंसानी शरीर में प्रवेश करते है और कई बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए इसको कंट्रोल करने पर भी जोर दिया गया है।

इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गाइडलाइन जारी की गई हैं।

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